राजस्थान यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन का चौथा साल शुरू होगा, रिसर्च के साथ मिलेगी डिग्री

जयपुर | 11 अक्टूबर 2026
राजस्थान यूनिवर्सिटी में स्नातक (Graduation) की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब विद्यार्थियों को तीन साल की ग्रेजुएशन के बाद चौथे साल में पढ़ाई जारी रखने का विकल्प भी मिलेगा। चौथे साल की पढ़ाई पूरी करने पर विद्यार्थियों को रिसर्च के साथ डिग्री प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
विश्वविद्यालय की सिंडिकेट बैठक में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और रिसर्च के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
15 विद्यार्थियों पर ही शुरू होगा सातवां सेमेस्टर
राजस्थान यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि चौथे वर्ष में प्रवेश के लिए न्यूनतम 15 विद्यार्थियों का होना जरूरी है। यदि किसी कोर्स में 15 से कम विद्यार्थी होंगे, तो वहां सातवां सेमेस्टर शुरू नहीं किया जाएगा। ऐसे विद्यार्थियों को तीन वर्षीय बैचलर डिग्री प्रदान की जाएगी।
इस नियम के तहत विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर चौथे वर्ष की पढ़ाई संचालित की जाएगी।
तीन साल और चार साल की डिग्री में क्या होगा अंतर?
नई शिक्षा नीति के अनुसार विद्यार्थियों को अपनी जरूरत और आगे की पढ़ाई की योजना के हिसाब से विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा।
- तीन वर्षीय ग्रेजुएशन: तीन साल की पढ़ाई पूरी करने पर बैचलर डिग्री मिलेगी।
- चार वर्षीय ग्रेजुएशन: चौथे साल की पढ़ाई पूरी करने पर रिसर्च के साथ बैचलर डिग्री प्राप्त करने का विकल्प होगा।
- आगे की पढ़ाई: विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय में एक वर्षीय सर्टिफिकेट, दो वर्षीय डिप्लोमा और तीन वर्षीय डिग्री जैसे विकल्प भी नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुसार उपलब्ध होंगे।
राजस्थान यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों को भी मिलेगा लाभ
राजस्थान यूनिवर्सिटी से सात संघटक कॉलेज जुड़े हैं। जयपुर और दौसा में लगभग 636 सरकारी एवं निजी संबद्ध कॉलेजों के विद्यार्थी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े हैं।
इन कॉलेजों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्नातक की पढ़ाई करते हैं। नई व्यवस्था लागू होने से विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक योजना के अनुसार डिग्री और रिसर्च का विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, चौथे वर्ष की पढ़ाई का संचालन संबंधित कॉलेज की संबद्धता, उपलब्ध सुविधाओं और विश्वविद्यालय के नियमों पर निर्भर करेगा।
अस्थायी संबद्धता वाले कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए क्या नियम हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के तहत सातवें और आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई स्थायी संबद्धता प्राप्त तथा संबंधित पात्रता पूरी करने वाले सरकारी कॉलेजों में ही संचालित होगी।
अस्थायी संबद्धता वाले कॉलेजों के इच्छुक विद्यार्थियों को नियमों के अनुसार नजदीकी संघटक या स्थायी संबद्धता प्राप्त कॉलेज में प्रवेश का अवसर दिया जा सकता है।
इसलिए विद्यार्थियों को चौथे वर्ष में प्रवेश लेने से पहले अपने कॉलेज और विश्वविद्यालय से संबंधित दिशा-निर्देशों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
विद्यार्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
चार वर्षीय ग्रेजुएशन कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो अपने विषय में गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं और रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। इससे विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई की योजना बनाने और अपनी शैक्षणिक रुचि के अनुसार विकल्प चुनने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, प्रवेश लेने से पहले विद्यार्थियों को अपने कोर्स की पात्रता, उपलब्ध सीटों और संबंधित कॉलेज में सातवें सेमेस्टर के संचालन की पुष्टि करनी चाहिए।
निष्कर्ष
राजस्थान यूनिवर्सिटी में चार वर्षीय ग्रेजुएशन कार्यक्रम की शुरुआत नई शिक्षा नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत विद्यार्थियों को तीन साल की बैचलर डिग्री के साथ चौथे वर्ष में रिसर्च आधारित पढ़ाई का विकल्प मिल सकेगा। सातवें सेमेस्टर के लिए न्यूनतम 15 विद्यार्थियों की शर्त और कॉलेजों की संबद्धता संबंधी नियम इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नोट: विद्यार्थियों को प्रवेश, पात्रता और चौथे वर्ष की पढ़ाई से संबंधित अंतिम जानकारी के लिए राजस्थान यूनिवर्सिटी की आधिकारिक अधिसूचना और अपने कॉलेज से पुष्टि करनी चाहिए।
